hindi kavitaen:-विमलेश त्रिपाठी की कविताएं

 

 कविता📖

विमलेश त्रिपाठी नई पीढ़ी के सुपरचित कवि एवं कहानीकार हैं । कविता में लम्बी उदासी कविता पर इन्हे भारतभूषण अग्रवाल सम्मान प्राप्त है। आज बेला हिंदी ब्लॉग पर पढ़ते हैं उनकी कुछ चुनिंदा कविताएँ

 विमलेश त्रिपाठी की कविताएं


hindi kavita विमलेश त्रिपाठी


मै सच का बच्चा हूँ

अगर उस मुल्क के तुम वज़ीर हो
जिस मुल्क में मेरा जन्म हुआ
जहाँ मेरे पुरखे रहे सदियों
अपने हाथ से हल की मूठ धरे
तो क्या तुम्हारी हाँ में हाँ मिलाऊँ
जबकि मैं इस मुल्क को जानता हूँ
इसके इतिहास और भूगोल को जानता हूँ
सिर्फ़ इस भय से कि तुम्हारे पास फ़ौज है
असलहे हैं
और तुम्हारे पास अपनी पोसुआ जनता भी तो है
तुम्हारी हर बात पर जयकार करती
यह सोचकर कि तुम्हारे एक इशारे पर
मैं एक साबुत आदमी से तस्वीर बना दिया जाऊँगा
मैं भी तुम्हारा पोसुआ बन जाऊँ क्या
न कहूँ सच
हो जाऊँ और बहुत सारे लोगों की तरह गूँगा ग़ुलाम
नहीं वज़ीर
मैं सच का बच्चा हूँ
सच ही बोलूँगा।


जटिल कथा

डूब जाने दो
अतीत की कंदराओं में
गल्प का एक सूत्र
वहीं कहीं ज़रूर होगा
वही सूत्र
जानता है कि यह जटिल कथा
राजा और परजा की
तुम्हारे हमारे बीच की
कैसे पूरी होगी।


मैं लोकतंत्र बोल रहा हूँ

मैं अपने पिछले जन्म की कथा भूल चुका हूँ
भूल चुका हूँ सब कुछ
सिवाय इसके कि मेरी शक्ल
किसी जैविक तत्त्व से बहुत मिलती-जुलती थी
इस जन्म में चारों ओर अंधकार है
इतना अंधकार कि ख़ुद को टटोलकर देखना है
कि वह कौन-सा अंग है जिसके सहारे रेंगते हुए
रोशनी का कोई एक सुराख़ मैं खोज सकता हूँ
इस जन्म और समय में
मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती
ख़ुद को ठीक-ठीक और साबुत
ज़िंदा रखना है।


अपने हिस्से का जीवन

मैं यूँ ही नहीं हूँ इस दुनिया में
समय ने समय-समय पर
जो विष भरा है
उसे अमृत बना देने का काम
सहज तो नहीं ही है
वह तो करना ही है
इसलिए कि ख़ुद के सामने ही
खड़ा हो सकूँ तनकर
विष नहीं
अमृत-घट छोड़ जाऊँ
समय को समर्पित
एक देश में
अपने हिस्से का जीवन
एक अमृत-घट।

ये भी पढ़ें:-

चुनौती

कौन पोंछेगा तुम्हारे आँसू कवि
किसके पास मरहम तुम्हारे अबूझ घावों के
क्या शब्द ही आसरा हैं
समय की भीषण बारिश और तूफ़ान बीच
ठहरने को कुछ देर
तुम्हें ख़ुद ही साफ़ करने हैं मवाद
अकेले रोना है
अकेले ही जश्न मनाना है
इस घातक और मायावी समय में
कविता तो सिर्फ़ एक छलावा है
ज़िंदगी का ताप
ख़ूब सच और खरा
उसके सामने खड़ा होना बेख़ौफ़—बेशर्म
यही सबसे बड़ी चुनौती मेरे अपने
मेरे मीत।


सत्य

अपने को सही साबित करने के लिए
तुम ख़ूब कहानियाँ गढ़ना
कर देना साबित मुझे
इस धरती का सबसे निकृष्ट जीव
तुम्हारी ईर्ष्या का यही खाद्य है बंधु
तुम्हारे अहं के कलंक को अच्छाई
और सत्य से नहीं धोया जा सकता
उसे तुम्हारे हृदय के विष ने पोषित किया है
तुम इस समय के दोस्त हो
प्रेम हो
और असंख्य लोगों के ईश्वर भी
मैं जानता हूँ कि तुम ही जीतोगे
हर बार जैसे जीत जाता है असत्य
मैं पराजित अपने सत्य की
गठरी के साथ धूल हो जाऊँगा
मैं मिट्टी हूँ
जीवन हूँ
जिसे रहना है अलक्षित
पराजित का कोई इतिहास नहीं होता बंधु
उसके हिस्से के अँधेरे में ही चमकना तुम
मैं ख़ुश हूँ
मैं अँधेरा हूँ
जिसको चीरकर चमकेगा तुम्हारा प्रतिशोध
तुम अमर हो जाना
मैं सदियों इंतिज़ार करूँगा
उस सत्य का जिसके सपने ने
मुझे आदमी बनाया।
-----------!!!!!--------

Post a Comment

1 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.