कविता
डॉ. ज़हीर अली सिद्दीकी की कविताएं समकालीन हिंदी कविता में एक नई ऊर्जा का संचार करती हैं। ये रचनाएँ जीवन की दार्शनिक गहराई को वैज्ञानिक अवधारणाओं से जोड़ती हैं, साथ ही पौराणिक कथाओं को सामाजिक न्याय की दृष्टि से पुनर्व्याख्या करती हैं। इन कविताओं में ऊर्जा के संरक्षण को जीवन की निरंतरता का प्रतीक बनाकर जाति-धर्म के विभेदों पर प्रहार है, जो आज के विभाजित समाज में प्रासंगिक है।
ये कविताएँ न केवल विचारोत्तेजक हैं, बल्कि भाषा की सादगी में गहनता समाहित करती हैं। वे हमें याद दिलाती हैं कि इतिहास के दबे किरदार आज भी प्रश्न उठाते हैं, और ऊर्जा का वह अंश जो हम सबमें है, समानता की नींव है। आइए आज हम बेला हिंदी पर पहली बार पढ़ते हैं डॉ. जहीर अली सिद्दीकी की कविताएँ__ मॉडरेटर
ऊर्जा का अंश...
समय का चक्रऔर उसकी गतिऊर्जा का संरक्षणऔर उसका स्थानांतरणवज़ूद और उसका विकासएक दूसरे के पूरक हैं .ऊर्जा अवतरित नहींहस्तांतरित हुई हैजन्म की सरहदों कोलांघकर पुनर्जीवित हुई हैऊर्जा कई कालखण्ड सेसिंचित वह महाकाव्य हैजो अध्यायों के अधीन है ..मैं भी तो उसी ऊर्जा काअंश हूँ जो अनादि काल सेहस्तांतरित हुई है.यही ऊर्जा पुरखों सेविरासत में मिली है..जीवन के इस ऊर्जा कावर्गीकरण उचित नहींइसे गरीब तो कोईअमीर बोलता हैकोई कालातो कोई गोरा बोलता हैकोई धर्म से तोकोई जाति से जोड़ता है...परन्तु मेरे लिए तो महज़ऊर्जा का अथाह स्रोत जोजन्म और जन्मदाता केकिरदार से जुड़ा हैयह कालजयी किरदारसर्वकालिक वज़ूद सेसंचालित एवं स्वचालित है...
एकलव्य का किरदार
किरदारों में नाम तुम्हाराअमर और जीवंत सदाकुल निषाद हस्तिनापुर कीगौरवगाथा गान सदा...जब प्रकृति नाम पुकारेकुल तुम्हारा सदा दुलारेप्रकृति रक्षक नाम ना दूजाकिरदारों में आपकी पूजा...अर्जुन नाम जाप जब होगाउनसे ऊपर आपका होगाएक बाण से नेत्र को भेदादूसरा बिन क्षति मुँह में ठूसा...इच्छाशक्ति के किरदारों मेंजाप आपके नाम का होगाअसंभव के गलियारों मेंसम्भव नाम आपका होगा...
अतीत में दबा किरदार
द्रोण का आदर्श भीएक मोल से मैला हुआमलिन मन उस मैल सेगंदा पड़ा है आज भी...मोल पर इतिहास भीतब मौन होकर रह गईजब गुरु का गौरव भीगुमनाम होकर रह गया ...बिन गुरु, तिरस्कार भीपर धनुर्धर था श्रेष्ठतमदक्षिणा क्यों माँगनाजब दायरा था न्यूनतम...उदय होता सूर्य भीअस्त छल से हो गयाबिखरी किरणें आज भीउपहास करती रह गयीं...अतीत में दबा हुआकिरदार जिंदा आज भीप्रश्न करता दिख रहागुरुओं से गुरुकुल धाम की...
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डॉ. ज़हीर अली सिद्दीकी



